बिहार, मखाने का प्रमुख उत्पादक राज्य है। देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 80-85 प्रतिशत उत्पादन बिहार में ही होता है। अब बिहार का मखाना यूरोपीय देश ग्रीस तक पहुंच चुका है। जी हां, बिहार के पूर्णिया जिले में उत्पादित मखाने की खेप ग्रीस पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ये जानकारी दी।
पूर्णिया से भेजी गई 1 मिट्रिक टन मखाने की खेप
पीयूष गोयल ने बताया कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से पूर्णिया से ग्रीस को 1 MT मखाने की खेप निर्यात की गई है। ये कदम बिहार के पारंपरिक मखाना उत्पादकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और किसानों के लिए बेहतर आय के मौके सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से पिराएउस भेजी गई थी खेप
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को बताया था कि पूर्णिया जिले के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से मखाने की ये खेप मंगवायी गई थी, जिसे दिल्ली के एस. एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए ग्रीस भेजा गया था। ये खेप गुजरात के के मुंद्रा बंदरगाह से ग्रीस के पिराएउस पोर्ट भेजा गया था।
घरेलू बाजार की तुलना में मिली ज्यादा कीमत
इस निर्यात के परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में प्राप्त होने वाली कीमत की तुलना में ज्यादा कीमत मिली है। इससे ये पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार मखाना उत्पादकों के लिए अतिरिक्त मूल्य सृजित करने की क्षमता रखते हैं। निर्यात के जरिए बाजार तक ऐसी पहुंच उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच संबंधों को मजबूत कर सकती है। साथ ही, ये किसानों के लिए बेहतर कमाई के मौके भी सृजित कर सकती है।
दुनिया के प्रमुख मखाना उत्पादक देशों में शामिल है भारत
मखाना उत्पादन में भारत, दुनिया में अग्रणी है और देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80-85 प्रतिशत है। बिहार के 10 जिलों के 35,000 हेक्टेयर से ज्यादा इलाके में मखाने की खेती होती है। इस सेक्टर को जमीनी स्तर पर बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (BAU), सबौर और आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मखाना, दरभंगा से तकनीकी मदद मिल रही है।
पूर्णिया से ग्रीस को किया गया निर्यात, बिहार के मखाना उत्पादकों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के बढ़ते प्रयासों का हिस्सा है। बिहार के साथ अपने मजबूत पारंपरिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण, मखाना भारत के कृषि निर्यात बास्केट में एक महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में उभरा है।
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